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Congenital heart diseases and defects increasing in infants in india due to less doctors and heart centers dlpg

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नई दिल्‍ली. मारत में नवजात और छोटे बच्‍चों में जन्‍मजात दिल की बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है. Congenital Heart Disease Con ‍च जबकि इलाज के मामले में अभी भी हमारा देश फिसड्डी है. फतनी बड़ी संख्‍या में दिल की बीमारी से जूझ रहे बच्‍चों में से सिर्फ 10-15 फीसदी बच्‍चों को ही पर्याप् ‍ यही वजह है कि युवा होने से पहले तक हजारो ं्‍चों की इससे विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड -19 (Covid-19) न ो म म म ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च ‍च म म म म म म म म म म म म ग ग ग ग ग ग ग ग ग ग ग ग ग आम भाषा में समझें तो बच्‍चों के दिल ंेद से लेकर खून की नसों का सिकुड़ना, वॉल्‍व में परेशानी, आर्टरी का ब्‍

हाल ही में इंडल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली की जानी-मानी बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पपोफेसोफेसोफेस अनीतसकसेनोफेस कीसकसेन कीकीओ हहललमें पेपपेपचे भमेंीब गयमेंत गयमेंत गयमेंत गयमेंी भमेंी मेंमेंी मेंगंभीी गयगंभीी गयगंभीी गयपैदी होतेपैदी केपैदी केपैदीहैं. जिन्‍हें जन्‍म के पहले साल में ही इलाज की जरूरत होती है. कि दक्षिणी और उत्तर पूर्वी भारत में 6500 15र 1500 नवजात शिशुओं को ये बीमारी जन्‍म के समय होती है. लेकिन खास बात है कि इनमें से उत्‍तर भारतीय राज्‍यों के सिर्फ 17 फीसदी बच्‍चों को ही इलाज मिल पाता है. 72कि दक्षिण भारत के 72% पूर पूर्वी उत्‍तर भारत के 0 फीसदी बच्‍चों को सही उपचार मिल ा मसे में बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से ये बेहद चिंताजनक है.

बच्‍चों में दो प्रकार की मिल रहीं जन्‍मजात दिल की बीमारियां
1. Acyanotic congenital heart defects (Acyanotic congenital heart defects)
.वेंट्रिकुलर सेप्‍टल डिफैक्‍ट (Ventricular septal defect or VSD).
. Rial्रियल सेप्‍टल डिफैक्‍ट Atrial septal defect (ASD).
. Patent ductus arteriosus or PDA
. Monल्‍मोनरी वॉल्‍व स्‍टेनोसिस (Pulmonary valve stenosis)

2. सायनोटिक कॉन्‍जेनिटल हर्ट डिफेक्‍ट cy
Etेट्रालॉजी ऑफ फेलॉट (Tetralogy of Fallot)
. Transposition of the great vessels position्रांस्‍पोजिशन (Transposition of the great vessels)
. Monल्‍मोनरी एट्रेसिया (Pulmonary atresia)
. Hypoplastic left heart syndrome (Hypoplastic left heart syndrome)
. Ric्रायकस्‍पिड वॉल्‍व एब्‍नोर्मेलिटी ज

85 फीसदी मामलों में नहीं पता बीमारी की वजह
बबहदयदय ोगबदयदय एसोसिएटपपप एसोसिएटपपोफेसोफेसोफेस वीयेंदेंदेंदेंदतिशतण ककण ककण कपतण कपतण नहींपतण नहींपतण नहींपतण नहींहैण नहींपतण नहींपतण नहींपतण नहींहैण नहींपतण नहींहैण नहींहैण नहींहैण नहींपतण नहींपतण पतपतण नहींपतण नहींहैण नहींहैण नहींहैण नहींहैण नहींपतण नहींपतण नहींपतण नहींहैणहै है. सिर्फ 10-15 फीसदी रोगियों में ही आनुवंशिकता की भूमिका पाई जाती है. हालांकि गर्भावस्‍था के दौरान मांओं को होने वाले वायरल यानि रूबेला नवजात शिशुओं में सीएचडी की उपस्थिति के साथ ग. वहीं अगर किसी मां को मधुमेह है या वह धूम्रपान या शराब का सेवन करती है तो भी नवजात को सीएचडी ह

इसके अलावा गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान, विशेष रूप से टेराटोजेनिक दवाओं का सेवन, गर्भवती महिला का अनानुपातिक बीएमआई, माता-पिता की बढ़ती उम्र, सगोत्रीय विवाह, इन-विट्रो फर्टीलाईजेशन तकनीक से गर्भाधान वे अन्य प्रमुख कारण हैं जिन्हें सीएचडी पैदा करने वाले कारणों में शामिल किया जा सकता है. असके अलावा परिवार में अगर किसी को ये बीमारी है तो भी बच् ‍च

रोकथाम के लिए माता-पिता का जागरुक होना जरूरी
विजयताड़ा के एस्टर रमेश अस्पताल में सलाहकार, बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजी डॉ. मुर्तजा कमल कहते हैं कि निवारण हमेशा इलाज से बेहतर है. सीएचडी की रोकथाम मुश्किल है क्योंकि ज्यादातर मामलों में इसका कारण पता ही नहीं है. हिलाओं को शिक्षित करने और महिलाओं के सशक्तिकरण से इस क्षेत्र में मदद मिल सकती है इसके साथ ही जिन कारणों की जानकारी है उसे लेकर भावी माता-पिता सीएचडी की जांच के लिए फीटल इको एक जरूरी उपकरण है. 18-20ससे जांच गर्भावस्‍था के 18-20 वें सप्ताह में होती है, ऐसे में अगर चिकित्‍सक स अगर जन्म के समय या उसके तुरंत बाद बच्चे में बीमारी का पता चल गया है तो उसमें देरी न करें, बल्कि तत्काल बीमारी का निदान कराएं, नहीं तो यह बढ़कर परेशानी पैदा कर सकती है.

डॉ. कमल कहते हैं कि भोजन में फोलिक एसिड की खुराक ने कनाडा के दो अध्ययनों में सीएचडी की कमी पर प्रभाव दिखाया है. ऐसे में फॉलिक एसिड का फोर्टीफिकेशन और सप्लीमेंट एक अन्य रणनीति है जिसका उपयोग हमारे देश में सीएचडी के जन्म के प्रसार को कम करने के लिए किया जा सकता है और किया भी जा रहा है. ममण, शकबणणण उचककतचतच कऔ कऔ कऔोकियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियियबचनेबचनेबचने कीकीियदी कीकीियिय कीकीकीकी कीकीहैदी सकतीकीसकती. फर्तमान में में हमारे देश में सिर्फ 130 हृदय बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जिनकी संख्‍या को बढ़ाया जाना जरूरी है.

देश में इलाज के लिए सिर्फ 60 ह्रदय केंद्र

Tags: Artificial Heart, Health News, Heart attack, Heart Disease



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