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महिला दिवस 2022: महिलाएं मानसिक स्वास्थ्य को कैसे रखें बेहतर? ंानें मनोचिकित्सक डॉ. प्रेरणा शर्मा की राय

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International Women’s Day 2022: हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) मर महिलाओं से जुड़े कई आयोजन होते हैं. इसमें महिलाओं के अधिकारों पर चर्चा होने के साथ ही उन्हें समाज में समान दर्जा दिए जाने को लेकर काफी लेकिन इन सबके बीच महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health of Women) पहलू अनदेखा रह जाता है. महिलाओं को समर्पित इस खास दिन पर इस पर चर्चा होना भी बेहद जरूरी है. महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर इसी कड़ी में हमने 08 मार्च को शाम 7 बजे फेसबुक लाइव के जरिये प्रेरणा शर्मा से बात की. फेसबुक लाइव देखने के लिए यहां क्लिक करें.

The following is a list of our most popular pages in the world. महिला और पूरुष दोनों ही मानसिक बीमारी से तेजी से ग्रस्त होने लगे हैं. लेकिन पुरुषों के मुकाबले दोगुना से भी ज्यादा महिलाएं मानसिक बीमारियों से जूझ रही हैं. How do you know if you are a native? इसे लेकर जब मनोचिकित्सक डॉ. पपेेेेेेमममममममममममममममममममममगय गयभीीी तोभीी बीमऔी बीमदोनोंीके दोनोंत दोनोंमें से आती आती आती आती आती आती दोनों त त त तमें]दोनोंत आतीमेंीके आतीमें.

उनका कहना है कि पुरुष और महिलाएं दोनों में मानसिक बीमारी से ग्रस्त होने के अलग-अलग कारण होते हैं. मरुषों और महिलाओं के साइको सोशल रिजन अलग-अलग हैं. डॉ. शर्मा आगे कहती हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में कम उम्र में ही मेंटल प्रॉब्लम होने सखख क मारत में महिलाओं की स्थिति को लेकर डॉ. Esticर्मा कहती हैं कि हमारे देश में दो तिहाई महिलाएं हरेलू हिंसा (Domestic Violence) इंटर इंटिमट

How do you do that in the future? स सवाल का जवाब देते हुए डॉ. प्रेरणा शर्मा कहती हैं कि इसके पीछे एक कारण इकोनॉमिक कॉस्ट भी है. Phआगे आगे जोड़ती हैं कि पिछले कुछपिछलेत समसमतततयय तोलेकिनसतयय केलेकिनससययहें लेकिनकोस य लेकिनआय य लेकिनआय पआय पआय लेकिनहैंहेंनसिकहें हैंलकलकनसिकनसिकहेंहेंकेकेकेकेकेकेकेके हैंलकषण हैंहैंहैंहैंकेकेकेकेकेकेकेकेकेकेकेके डॉ. शर्मा का कहना है कि हमारे यहां महिलाओं की फिजिकल हेल्थ ो ी े े े े

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बीते कुछ वक्त में ‘सुपर वुमन सिंड्रोम’ ये शब्द काफी प्रचलित हो गया है ये आखिर क्या है? पस पर डॉ. कर्मा कहती हैं कि महिलाओं से सभी को सारी अपेक्षाएं होती हैं. महिलाएं भी सबकुछ करना चाहती हैं. करिवार की देखभाल भी, किस की ड्यूटी भी. ऐसे में उनकी अंतरआत्मा को सुनना चाहिए. जब लगे कि हम अपने लिए परफॉर्म करने के बजाय दूसरों के लिए परफॉर्म कर रहे हैं तो रुक जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि घर का काम महिलाएं ही करेंगी ये धारणा है लेकिन इसमें महिलाओं का रोल डिफाइन नही ं

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ज्यादा स्ट्रेस हमारी फिजिकल हेल्थ को कैसे प्रभावित करता है? स सवाल का जवाब देते हुए डॉ. कर्मा कहती हैं कि हमारा माइंड और बॉडी दो अलग-अलग चीजें नहीं हैं. शर शरीर में तकलीफ होती है तो मन पर उसका प्रभाव पड़ता है और अगर मन ंीड़ा होती है ो हसे में हमारे शरीर और माइंड दोनों को संतुलित रखने की जरूरत है.

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